अश्रुजल से माँ की पूजा - श्री श्री सीतारामदास ओंकारनाथ
आध्यात्मिक साधना के विविध मार्गों में भक्ति सबसे सहज और सुगम है। पूज्य श्री श्री सीतारामदास ओंकारनाथ जी कहते हैं -"अश्रु 'भगवान् की उपासना में प्रधान साधन है। जो कोई अनुओं सहित उनकी आराधना करता है, भगवान् तत्काल ही फल देकर उसे शान्ति प्रदान कर देते हैं। हृदय की मलिनता को अश्रु जैसा कुछ और शुद्ध नहीं करता।"
गुरुदेव ने १५० से अधिक ग्रंथों की रचना की। उन्हीं में से यह - "अश्नु जल से माँ की पूजा" -
भक्ति के उसी सहज मार्ग का अद्वितीय ग्रंथ है। इसमें भक्त रुदन करता हुआ माँ को पुकारता है और उनकी करुणा से दर्शन चाहता है।
गुरुदेव लिखते हैं-
"माँ को पाने का उपाय आँसुओं के सिवा और कोई नहीं। आँसुओं के बिना कोई भी करोड़ों जन्मों के संस्कारों का नाश नहीं कर सकता।"
अनुमय साधना से अंततः भक्त माँ की असीम कृपा का अधिकारी बनता है - यही इस ग्रंथ का सार है।
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